23/02/2026
Charminar, Telangana
चारमीनार तेलंगाना राज्य की राजधानी हैदराबाद का सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक स्मारक है. यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल हिस्सा माना जाता है. 1591 ईस्वी में कुतुब शाही वंश के पांचवें शासक सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने इसका निर्माण करवाया था. उस समय गोलकुंडा से नई राजधानी हैदराबाद बसाई गई थी.
चारमीनार का निर्माण प्लेग महामारी के अंत की खुशी और अल्लाह का शुक्र अदा करने के लिए किया गया था. ऐसा माना जाता है कि सुल्तान ने प्लेग खत्म होने पर मस्जिद बनाने की मन्नत मांगी थी. यह इमारत इंडो-इस्लामिक स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है. चारमीनार का नाम उर्दू के "चार" और "मीनार" से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है चार मीनारें. इसकी चारों मीनारें 48.7 मीटर (लगभग 160 फीट) ऊँची हैं. प्रत्येक मीनार पर सुंदर जालीदार काम और मेहराबें बनी हुई हैं. चारमीनार के आधार पर चार विशाल मेहराबें हैं जो चार दिशाओं में खुलती हैं. इसकी दूसरी मंजिल पर एक छोटी मस्जिद बनी हुई है, जो हैदराबाद की सबसे पुरानी मस्जिद मानी जाती है.
चारमीनार के ठीक नीचे से चार सड़कें निकलती हैं, जो शहर को चार हिस्सों में बाँटती हैं. इसके आसपास लाड बाजार, घंसी बाजार और मक्का मस्जिद जैसे प्रसिद्ध स्थान हैं. लाड बाजार चूड़ियों और पारंपरिक जेवरात के लिए मशहूर है. चारमीनार हैदराबाद का प्रतीक चिन्ह बन चुका है. यहाँ हर साल लाखों पर्यटक आते हैं. ईद, रमजान और अन्य त्योहारों पर यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है.
चारमीनार के चारों ओर व्यस्त बाजार और पुरानी हवेलियाँ इसकी खूबसूरती बढ़ाती हैं. आज भी यह 400 साल से अधिक पुरानी इमारत मजबूती से खड़ी है. चारमीनार तेलंगाना की पहचान और गौरव का प्रतीक है. यह हमें इतिहास, कला और संस्कृति का अनोखा संगम दिखाती है. यह स्मारक न केवल स्थानीय लोगों का गर्व है, बल्कि पूरे भारत की शान है. चारमीनार देखकर हैदराबाद की ऐतिहासिक महिमा का अहसास होता है.
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