05/06/2026
दिल्ली-लेह मार्ग पर सफर के दौरान आज एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि HRTC के कर्मचारी सिर्फ बस चलाने वाले नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में डटकर खड़े रहने वाले योद्धा हैं। यात्रा अपने निर्धारित समय के अनुसार चल रही थी कि अचानक बस का एक टायर फट गया। यह कोई सामान्य सड़क नहीं थी जहाँ कुछ दूरी पर मैकेनिक या वर्कशॉप मिल जाए। चारों ओर ऊँचे पहाड़, सुनसान रास्ते और दूर-दूर तक सहायता का कोई साधन नहीं था।
लेकिन शायद यही वह पल होता है जहाँ अनुभव और जिम्मेदारी की असली परीक्षा होती है। बस स्टाफ ने बिना घबराए स्थिति को संभाला। किसी बाहरी मदद का इंतजार करने के बजाय चालक और परिचालक स्वयं ही मैकेनिक बन गए। कुछ ही समय में खराब टायर को बदलकर बस को फिर से यात्रा के लिए तैयार कर दिया गया। यात्रियों के लिए यह केवल टायर बदलने की घटना थी, लेकिन वास्तव में यह उन लोगों की मेहनत, अनुभव और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण था जो हर दिन ऐसे कठिन रास्तों पर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
दिल्ली-लेह का यह मार्ग दुनिया के सबसे कठिन बस मार्गों में गिना जाता है। हजारों फीट की ऊँचाई, अनिश्चित मौसम, दुर्गम सड़कें और सैकड़ों किलोमीटर तक किसी प्रकार की तकनीकी सहायता का अभाव। ऐसे में HRTC का स्टाफ केवल चालक और परिचालक नहीं रहता, बल्कि जरूरत पड़ने मैकेनिक, तकनीशियन और यात्रियों का सबसे बड़ा सहारा भी बन जाता है। विडंबना यह है कि जिन लोगों के भरोसे हजारों यात्रियों की यात्राएँ सुरक्षित पूरी होती हैं, उन्हें कई बार समय पर वेतन तक नहीं मिल पाता। फिर भी न उनकी जिम्मेदारी कम होती है और न ही सेवा के प्रति उनका समर्पण। शायद यही कारण है कि HRTC केवल एक परिवहन निगम नहीं, बल्कि हिमाचल और देश के दुर्गम क्षेत्रों की जीवनरेखा कहलाती है।
ऐसे जांबाज़ कर्मचारियों को दिल से सलाम। क्योंकि मंज़िल तक पहुँचने वाली हर बस के पीछे किसी न किसी चालक और परिचालक की अनदेखी मेहनत, त्याग और जिम्मेदारी छिपी होती है। 🫡🚌❤️