Bagdawat Katha

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09/02/2023

24 बगड़ावतों के नाम - 24 bagadawaton ke naam - Ramlal gurjar
24 बगड़ावतों के नाम_Dev Narayan
24 बगड़ावतों के नाम
चौइस बगड़ावत भाइयों के नाम - नेवाजी जी बगड़ावत

24 बगड़ावतों के नाम
1 तेजा जी बगड़ावत 13 कासों जी
2 सेजा जी बगड़ावत 14 गूदड़ जी
3 सवाई भोज बगड़ावत 15 खोतड़ जी
4 नेवाजी जी बगड़ावत 16 कोलाज
5 धनाजी जी 17 कुबाना जी
6 माहरावत जी 18 करणा जी
7 बाहरावत जी 19 जिवन जी
8 झड़सी जी 20 कानू जी बगड़ावत
9 बड़ी जी 21 लालो जी बगड़ावत
10 सांगा जी 22 झाला जी बगड़ावत
11 मांगा जी 23 जोधा जी बगड़ावत
12 झांसा जी 24 बाला जी बगड़ावत
चौइस बगड़ावत भाइयों के नाम - नेवाजी जी बगड़ावत

बगड़ावतों का युद्ध - नियाजी मुझे अपना शीश दे दीजिए।

Hindu God story रण क्षेत्र में नियाजी के पास रानी जयमती (भवानी) आती है और कहती है कि नियाजी मुझे अपना शीश दे दीजिए। आपने वचन दिया था कि मैं एक बार आपसे जो भी मांगूगीं आप मुझे वो दे देंगे। नियाजी अपने हाथ से ही अपना शीश काटकर भवानी के थाल में रखकर देते हैं और कहते हैं कि भाभीजी मेरा वचन पूरा हो गया। नियाजी का सिर कटने के बाद उनकी छाती में आँखे निकल आती हैं, नाभि की जगह मुँह बन जाता है और गले के ऊपर कमल का फूल खिल जाता है। सिर कटने के बाद भी नियाजी अपने दोनों हाथों से हाथियों की पूंछ पकड़कर घुमा-घुमाकर फेंक देते हैं। जिनके नीचे दबकर कई सैनिक मर जाते हैं।

देवनारायण की कथा व इतिहास । Dev narayan ki katha & history

भगवान देवनारायण जी की सम्पूर्ण कथा,Story of Lord Devnarayan in Hindi

भगवान देवनारायण जी की सम्पूर्ण कथा_Story of Lord Devnarayan in Hindi
भगवान देवनारायण जी की सम्पूर्ण कथा,Story of Lord Devnarayan in Hindi
भवानी नियाजी से कहती है कि आपका माथा कटने के बाद भी आप लड़े जा रहे हैं और कहती है कि माथा तो है नहीं मैं आपकी आरती करूं तो तिलक कहाँ करूं। नियाजी कहते हैं माताजी मैं आपको मान गया हूं। बस आपने आरती कर ली। भवानी सोचती है कि यह तो अभी रुकेगा नहीं। भवानी सोचती है कि यह तो सिर कटने के बाद भी लड़ता जा रहा है इसलिए क्यों न मैं इसे नील का छींटा दे दूँ (जो कि अशुभ होता है) जिससे नियाजी खाण्डा डाल देंगे। नियाजी को भवानी की बात समझ आ जाती है और उनकी वाणी होती है कि भाभीजी मेरे ऊपर नील का छींटा मत डालना। इससे मेरा मोक्ष नहीं होगा। मैं खाण्डा डाल देता हूँ लेकिन माँ चामुण्डा मेरा वंश खत्म मत करना जैसे तूने भूणाजी, मेहन्दू जी और मदनो जी को छोड़ा है वैसे मेरे वंश को छोड़ देना। इस पर

मां चामुंडा, 24 बगड़ावत कथा,नियाजी अब खाण्डा छोड़ देते हैं और पृथ्वी माता से निवेदन करते हैं कि मुझे धरती में समा ले।
भवानी नेतुजी के ६ महीने के गर्भ को जीवित छोड़ देने का वचन देती है। नियाजी अब खाण्डा छोड़ देते हैं और पृथ्वी माता से निवेदन करते हैं कि मुझे धरती में समा ले। जब सवाई भोज को नियाजी की मौत का पता लगता है तो वह भवानी को कोसते हैं कि तू मेरे निया जैसे भाई को खा गई। भवानी कहती है कि मैं तो डायन हूं। नियाजी की क्या सोच करते हो, मैं तो द्रौपदी बनकर कौरवों और पाण्डवों को खा गई, मेरा तो काम ही यही है। सवाई भोज कहते हैं कि नियाजी जैसा भाई तो मुझे कभी नहीं मिल सकता। वह मेरे २२ भाइयों के बराबर एक ही था। भवानी कहती है कि मैं कई देवी देवताओं को खा गई, तू एक नियाजी की क्या बात करता है। मैं तो बड़े- बड़ों को खा गई। सवाई भोज कहते हैं कि माँ चामुण्डा दूर रह ये तेरी करनी मुझे जचीं नही मुझे। नियाजी के बाद रण भूमि में बाहरावत जी अपनी सेना के साथ युद्ध करने के लिए आते हैं और वो भी लड़ाई करते हुए मारे जाते हैं। 24 बगड़ावतों के नाम ,24 bagadawaton ke naam,Ramlal gurjar, 24 बगड़ावतों के नाम क्या थे, 24 बगड़ावतों के नाम बताएं

देवनारायण की कथा। युद्ध कलयुग का महाभारत का युद्ध था।
God story नियाजी और बाहरावतजी की तरह सभी भाई एक-एक करके रावजी की फौजों से युद्ध करने के लिए खारी नदी पर आए। खारी नदी पर ही सब युद्ध हुए थे। खारी नदी के एक किनारे पर रावजी की फौजें थी तो दूसरी और बगड़ावतों की फौजें। यह युद्ध कलयुग का महाभारत का युद्ध था। इस युद्ध में सवाई भोज के सभी महाबली योद्धा भाई काम आ गए। रानी को दिए वचन के अनुसार एक-एक भाई ने अपनी फौज के साथ खारी नदी पर आकर रावजी की सेना के साथ युद्ध किया था। इन बगड़ावत भाइयों की रानियाँ सतीवाड़े में सती होती हैं। चूंकि नेतुजी ६ महीने के गर्भ से थी इस अवस्था में वह सती नहीं हो सकती थी, इसलिए वह

24 बगड़ावतों के गुरु का नाम क्या था
बगड़ावतों के गुरु बाबा रुपनाथ की धूणी पर आती है और कहती है बाबाजी इस पेट में लोथ पल रहा है इसे निकाल कर आप अपने पास रख लो। बाबा रुपनाथ कहते है, मैं तेरे हाथ नहीं लगा सकता क्योंकि तू मेरे चेले की रानी है, मैने तेरे हाथ का खूब भोजन किया है, और यदि मैं तेरे को हाथ लगाता हूँ तो अगले जन्म में मैं सूअर बनूंगा यह सुनकर नेतुजी खुद ही अपना पेट चीरकर गर्भ बाहर निकाल कर बाबा को देती है और बाबा उसे अपने पास रखे भांग के घड़े में डाल देते हैं और ढक देते हैं। नेतुजी कहती है बाबा जी अब आप ही इसके मां-बाप हो और इसकी सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी है। यह कहकर नेतुजी अपनी कमर को वापस बांध लेती है और कहती है तीन महीने बाद इसका जन्म होगा और इसका नाम भांगड़े खान रखना। नेतुजी बाबा रुपनाथजी से कहती है इस बच्चे को साधू मत बनाना। और इसको सफेद कपड़े देना, भगवा वस्र मत पहनाना। राताकोट की जीत यही करेगा, यह बड़ा होकर अपने बाप का बैर लेगा। यह एक नया बदनोरा गांव बसायेगा। बाबा से आज्ञा लेकर नेतु वहां से सती होने के लिये जाती है जहां सभी

संपूर्ण बगड़ावत कथा - बगड़ावत भाईयों की स्रियाँ नहा धोकर १६ श्रृंगार कर सती होने के लिए अपने-अपने पति के शवों के साथ चिता में बैठ जाती हैं।
बगड़ावत भाईयों की स्रियाँ नहा धोकर १६ श्रृंगार कर सती होने के लिए अपने-अपने पति के शवों के साथ चिता में बैठ जाती हैं। सती होते समय नेतु रानी जयमती को श्राप देती है कि अगले जनम में तू बड़े घर में जन्म लेगी तेरे शरीर पर कोढ झरेगा, तेरे सिर पर सींग होगा और तेरे से शादी करने वाला कोई नहीं मिलेगा। रानी श्राप से भयभीत हो जाती है और नेतु से कहती है की मेरा उद्धार कैसे होगा। विनती करती है।नेतु कहती है कि पीपलदे के नाम से तू धार के राजा के यहां जन्म लेगी और भगवान देवनारायण मालवा से लौटते समय तेरा उद्धार करेगें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q . देवनारायण जी का विवाह- देवनारायण की पत्नी का नाम क्या था

ans देवनारायण भगवान की पत्नी का नाम पीपल देव धार के राजा की बेटी थी मध्य प्रदेश में स्थित

Q . देवनारायण जी के प्रसिद्ध मंदिर

ans देवनारायण भगवान का मंदिर राजस्थान में मालासेरी डूंगरी वैसे तो भगवान श्री देवनारायण का मंदिर हर गांव में देखा जा सकता है जैसे मध्य प्रदेश राजस्थान हरियाणा और भी बहुत सारी जगहों पर भगवान देवनारायण गुर्जर समाज के आराध्य देवता हैं मैंने लोक देवता भी कहा जाता है

Q . देवनारायण भगवान के माता पिता का नाम क्या था

ans देवनारायण भगवान के माता पिता का नाम वीर सवाई भोज और माता का नाम साडू गुजरी था

देवनारायण भगवान की गोत्र क्या थी

देवनारायण भगवान की गोत्र चौहान थी

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