27/07/2026
पिछले कई वर्षों से सोच रहा था कि राम के बारे में लिखूँ...
आज खुद को रोक नहीं पा रहा हूँ।
चलो, आज लिख ही देता हूँ।
आज पूरा भारत जिस "राम-राम" का उच्चारण कर रहा है, वह केवल एक आवेग, भावना या चरित्र नहीं है। "राम" न तो कोई नारा है और न ही किसी गुलामी का प्रतीक।
राम को समझना है तो पहले अपने जीवन में "राम" शब्द का बोध लाना होगा।
वैसे तो किसी के लिए राम एक पात्र हैं, किसी के लिए भगवान, किसी के लिए नारा, किसी के लिए संस्कृति, किसी के लिए शत्रु और किसी के लिए एक बीता हुआ शब्द।
पर जितना मुझे राम और "राम" शब्द समझ आया है, उसमें एक पूरा युग समाया हुआ है।
राम कौन हैं? यदि आज मैं यह समझा पाया, तो मेरा जीवन धन्य हो जाएगा।
राम वह पुत्र हैं, जो अपने पिता की कठिन और अनुचित प्रतीत होने वाली आज्ञा भी नहीं टालते।
राम वह भाई हैं, जो अपने भाई के लिए एक क्षण में समस्त वैभव त्यागकर वनवास और कठिन जीवन स्वीकार कर लेते हैं।
राम वह पति हैं, जो लोकमर्यादा और राजधर्म की रक्षा के लिए अपने जीवन के प्राण समान धर्मपत्नी से भी वियोग सह लेते हैं।
राम वह शासक हैं, जो अपनी प्रजा के हित के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर देते हैं।
राम वह हैं, जो सर्वोच्च होने के बाद भी स्वयं को प्रतिदिन कसौटी पर कसते हैं।
राम वह श्रेष्ठ पुत्र हैं, जिन्हें अपने पिता की मर्यादा से बढ़कर न राज्य चाहिए, न वैभव।
राम वह भाई हैं, जो अपने छोटे भाइयों के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं।
राम वह पिता हैं, जो चाहें तो अपने पुत्रों को राज्य दे दें, पर उन्हें भी अपनी योग्यता सिद्ध करने का अवसर देते हैं, क्योंकि संसार का हर पिता अपनी संतान को स्वयं से श्रेष्ठ देखना चाहता है।
राम वह मित्र हैं, जो मित्रता निभाने के लिए अजनबियों और शक्तिशाली शत्रुओं से भी टकरा जाते हैं।
राम वह भगवान हैं, जो अपने भक्त को अपने परिवार से भी ऊपर स्थान देते हैं।
राम वह शासक हैं, जो अपनी प्रजा के हित के आगे अपने व्यक्तिगत सुख-दुःख का त्याग कर देते हैं।
राम वह शब्द हैं, जिनका स्मरण जीवन के अंतिम क्षणों में भी मन को शांति और मुक्ति की आशा से भर देता है।
राम वह मित्र हैं, जिन्होंने मित्रता की परिभाषा बदल दी।
राम वह आधार हैं, जिनके सामने हर निराधार को सहारा मिल जाता है।
राम वह प्रत्यंचा हैं, जिनके सामने हर शस्त्र निष्प्रभ हो जाता है।
सच तो यह है, मित्रों, सदियाँ बीत जाएँगी राम की गाथा सुनाते-सुनाते।
और विश्वास मानिए, जिसने भी राम के किसी एक भी चरित्र को अपने जीवन में उतार लिया, वह राम के अत्यंत निकट पहुँच जाएगा, क्योंकि यह कलियुग है।
आज मेरे चारों ओर केवल रावण जैसे स्वभाव दिखाई देते हैं। मैं भी उन्हीं में से एक हूँ, पर मुझे खोजने पर भी एक राम नहीं मिला।
जानते हैं क्यों?
क्योंकि राम एक ही थे, राम एक ही हैं और राम एक ही रहेंगे।