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राष्ट्रहित का गला घोंटकर,              छेद न करना थाली में...*मिट्टी वाले दीये जलाना...*           *अबकी बार दीवाली में....
28/10/2016

राष्ट्रहित का गला घोंटकर,
छेद न करना थाली में...
*मिट्टी वाले दीये जलाना...*
*अबकी बार दीवाली में...*
देश के धन को देश में रखना,
नहीं बहाना नाली में..
*मिट्टी वाले दीये जलाना...*
*अबकी बार दीवाली में...*

बने जो अपनी मिट्टी से,
वो दिये बिकें बाज़ारों में...
छुपी है वैज्ञानिकता अपने,
सभी तीज़-त्यौहारों में...
चायनिज़ झालर से आकर्षित,
कीट-पतंगे आते हैं...
जबकि दीये में जलकर,
बरसाती कीड़े मर जाते हैं..
कार्तिक दीप-दान से बदले,
पितृ-दोष खुशहाली में..

*मिट्टी वाले दीये जलाना...*
*अबकी बार दीवाली में...*
*मिट्टी वाले दीये जलाना...*
*अबकी बार दीवाली में...*

कार्तिक की अमावस वाली,
रात न अबकी काली हो..
दीये बनाने वालों की भी,
खुशियों भरी दीवाली हो..
अपने देश का पैसा जाये,
अपने भाई की झोली में..
गया जो दुश्मन देश में पैसा,
लगेगा रायफ़ल गोली में..
देश की सीमा रहे सुरक्षित,
चुक न हो रखवाली में..

*मिट्टी वाले दीये जलाना..*
*अबकी बार दीवाली में...*
*मिट्टी वाले दीये जलाना..*
*अबकी बार दीवाली में...*
#धन तेरस की हार्दिक सुभकामनाये
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एक परिंदे के दर्द का फ़साना था टूटे थे पंख और उड़ते हुए जाना था तूफान तो झेल गया पर हुआ एक अफसोस वही डाल टूटी थी जिस पर ...
20/10/2016

एक परिंदे के दर्द का फ़साना था
टूटे थे पंख और उड़ते हुए जाना था
तूफान तो झेल गया पर हुआ एक अफसोस
वही डाल टूटी थी जिस पर उसका आशियाना था

11/11/2015

दीपों का त्योहार

होती थी वर्षा पहले
जब दिवाली मे जलते थे दिये

पर अब चाहे हो जैसे
दिवाली मे जलते है पैसे

छोड़ते है बम-पटाखे
और छोड़ते है रॉकेट
फैलाते है प्रदूषण
बढाते है बीमारी

चाहे हो जैसे

पर दिवाली मे जलते है पैसे
दिवाली मैं दिये अब जलते नहीं
दिये के स्थान पर है अब मोमबत्ती

मोमबत्ती का स्थान भी ले लिया अब बिजली
बिना बिजली के नहीं अब दिवाली
पर आपस मे ख़ुशी बॉंटने के जगह
खेलकर जुआ करते है पैसे की बर्बादी

चाहे हो जैसे

पर दिवाली में जलते है पैसे
दिवाली में जलते है पैसे

01/05/2015

बहुत समय पहले की बात है किसी जंगल में एक गधा बरगद के पेड़ के नीचे लेटकर आराम कर रहा था। लेटे-लेटे उसके मन में बुरे खयाल आने लगे, उसने सोचा कि यदि धरती फट गई तो मेरा क्या होगा?

अभी उसने ऐसा सोचा ही था कि उसे एक जोर के धमाके की आवाज आई। वह भयभीत हो उठा और चीखने लगा- भागो-भागो धरती फट रही है, अपनी जान बचाओ... और ऐसा कहते हुए वह पागलों की तरह एक दिशा में भागने लगा।

उसे इस कदर भागता देखते हुए एक अन्य गधे ने उससे पूछा कि अरे क्या हुआ भाई, तुम इस तरह बदहवास भागे क्यों जा रहे हो?

अरे तुम भी भागो… अपनी जान बचाओ, धरती फट रही है..., ऐसा चीखते हुए वह भागता रहा।

यह सुनकर दूसरा गधा भी डर गया और उसके साथ भागने लगा। अब तो वह दोनों एकसाथ चिल्ला रहे थे- भागो-भागो धरती फट रही है… भागो-भागो…।

देखते-देखते सैकड़ों गधे इस बात को दोहराते हुए उसी दिशा में भागने लगे।

गधों को इस तरह भागता देख अन्य जानवर भी डर गए। धरती फटने की खबर जंगल में लगी आग की तरह फैलने लगी और जल्द ही सबको पता चल गया कि धरती फट रही है। चारों तरफ जानवरों की चीख-पुकार मच गई। सांप, बिच्छू, सियार, लोमड़, हाथी, घोड़े... सभी उस झुंड में शामिल हो भागने लगे।

जंगल में फैले इस हो-हल्ले को सुन अपनी गुफा में विश्राम कर रहा जंगल का राजा शेर बाहर निकला। उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ कि सारे जानवर एक ही दिशा में भागे जा रहे हैं। वह उछलकर सबके सामने आया और गूंजती हुई दहाड़ के साथ बोला कि ये क्या पागलपन है? कहां भागे जा रहे हो तुम सब?

महाराज, धरती फट रही है, आप भी अपनी जान बचाइए।
झुंड में आगे खड़ा बंदर बोला।
किसने कहा यह सब? शेर ने प्रश्न किया।
सब एक-दूसरे का मुंह देखने लगे, फिर बंदर बोला कि मुझे तो ये बात चीते ने बताई थी। चीते ने कहा कि मैंने तो यह पक्षियों से सुना था और ऐसा करते-करते पता चला कि यह बात सबसे पहले गधे ने बताई थी।

गधे को महाराज के सामने बुलाया गया। तुम्हें कैसे पता चला कि धरती फट रही है? शेर ने गुस्से से पूछा।..मैंने अपने कानों से धरती के फटने की आवाज सुनी महाराज, गधे ने डरते हुए उत्तर दिया।

ठीक है चलो, मुझे उस जगह ले चलो और दिखाओ कि धरती फट रही है, ऐसा कहते हुए शेर गधे को उस तरफ ढकेलता हुआ ले जाने लगा। बाकी जानवर भी उनके पीछे हो लिए और डर-डरकर उस ओर बढ़ने लगे।

बरगद के पास पहुंचकर गधा बोला कि हुजूर, मैं यहीं सो रहा था कि तभी जोर से धरती फटने की आवाज आई, मैंने खुद उड़ती हुई धूल देखी और भागने लगा।

शेर ने आस-पास जाकर देखा और सारा मामला समझ गया। उसने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि यह गधा महामूर्ख है। दरअसल, पास ही नारियल का एक ऊंचा पेड़ है और तेज हवा चलने से उस पर लगा एक बड़ा-सा नारियल नीचे पत्थर पर गिर पड़ा। पत्थर सरकने से आस-पास धूल उड़ने लगी और ये गधा न जाने कैसे इसे धरती फटने की बात समझ बैठा।

शेर ने बोलना जारी रखा कि भाइयों, यह तो गधा है, पर क्या आपके पास भी अपना दिमाग नहीं है। जाइए, अपने घर जाइए और आइंदा से किसी अफवाह पर यकीन करने से पहले दस बार सोचिएगा।

सीख- किसी की भी बात पर यकीन करने से पहले अपना दिमाग का उपयोग जरूर करना चाहिए और यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी अफवास पर भरोसा करने से पहले उस मामले की जांच अवश्य कर लेनी चाहिए।

01/05/2015

मारवाड़ी कविता

आ दातल्ली केडी,
रजको वाडे जेडी
ओ रजको केडो,
भैया नोकें जेडो
ऐ भैयों केडी,
दूध दे जेडी
ओ दूध केडो,
दही वणे जेडो
ओ दही केडो,
मोखण वणे जेडो
ओ मोखण केडो,
घी वणे जेडो
ओ घी केडो बाटियों सोपडे जेडो,
ऐ बाटियों केडी
पोमणा जिमे जेडी,
ऐ पोमणा केडा
चुल्हा में नोकें जेडा

गर्मियों के दिनों में एक शिष्य अपने गुरु से सप्ताह भर की छुट्टी लेकर अपने गांव जा रहा था। तब गांव पैदल ही जाना पड़ता था।...
27/04/2015

गर्मियों के दिनों में एक शिष्य अपने गुरु से सप्ताह भर की छुट्टी लेकर अपने गांव जा रहा था। तब गांव पैदल ही जाना पड़ता था। जाते समय रास्ते में उसे एक कुआं दिखाई दिया।

शिष्य प्यासा था, इसलिए उसने कुएं से पानी निकाला और अपना गला तर किया। शिष्य को अद्भुत तृप्ति मिली, क्योंकि कुएं का जल बेहद मीठा और ठंडा था।

शिष्य ने सोचा - क्यों ना यहां का जल गुरुजी के लिए भी ले चलूं। उसने अपनी मशक भरी और वापस आश्रम की ओर चल पड़ा। वह आश्रम पहुंचा और गुरुजी को सारी बात बताई।

गुरुजी ने शिष्य से मशक लेकर जल पिया और संतुष्टि महसूस की।

उन्होंने शिष्य से कहा- वाकई जल तो गंगाजल के समान है। शिष्य को खुशी हुई। गुरुजी से इस तरह की प्रशंसा सुनकर शिष्य आज्ञा लेकर अपने गांव चला गया।

कुछ ही देर में आश्रम में रहने वाला एक दूसरा शिष्य गुरुजी के पास पहुंचा और उसने भी वह जल पीने की इच्छा जताई। गुरुजी ने मशक शिष्य को दी। शिष्य ने जैसे ही घूंट भरा, उसने पानी बाहर कुल्ला कर दिया।

शिष्य बोला- गुरुजी इस पानी में तो कड़वापन है और न ही यह जल शीतल है। आपने बेकार ही उस शिष्य की इतनी प्रशंसा की।

गुरुजी बोले- बेटा, मिठास और शीतलता इस जल में नहीं है तो क्या हुआ। इसे लाने वाले के मन में तो है। जब उस शिष्य ने जल पिया होगा तो उसके मन में मेरे लिए प्रेम उमड़ा। यही बात महत्वपूर्ण है। मुझे भी इस मशक का जल तुम्हारी तरह ठीक नहीं लगा।

पर मैं यह कहकर उसका मन दुखी करना नहीं चाहता था। हो सकता है जब जल मशक में भरा गया, तब वह शीतल हो और मशक के साफ न होने पर यहां तक आते-आते यह जल वैसा नहीं रहा, पर इससे लाने वाले के मन का प्रेम तो कम नहीं होता है ना।

कहानी की सीख - दूसरों के मन को दुखी करने वाली बातों को टाला जा सकता है और हर बुराई में अच्छाई खोजी जा सकती है।

27/04/2015

बचपन में जब धागों के बीच माचिस को फसाकर फोन-फोन खेलते थे,
तो मालूम नहीं था एक दिन इस फोन में ज़िंदगी सिमटती चली जायेगी।

हे भारत के मुखिया मोदी , बेशक समर्थक तुम्हारा हूंपर अपने मन के भीतर, उठते प्रश्नों से हारा हूंमेरे सारे मित्र मुझे , मोद...
21/04/2015

हे भारत के मुखिया मोदी , बेशक समर्थक तुम्हारा हूं
पर अपने मन के भीतर, उठते प्रश्नों से हारा हूं

मेरे सारे मित्र मुझे , मोदी का भक्त बताते हैं
पर मुझको परवाह नही है, बेशक हंसी उड़ाते हैं

मुझे 'संघ' ने यही सिखाया, व्यक्ति नही पर देश बड़ा
व्यक्ति आते व्यक्ति जाते , मैं विचार के साथ खड़ा

बचपन से ही मेरे मन में ,रहा गूंजता नारा है
जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है

इसीलिए तुमको कुछ कसमें ,याद दिलाना वाजिब है
मेरी आत्मा कहती है, ये प्रश्न उठाना वाजिब है

ये सौगंध तुम्हारी थी, तुम देश नही झुकने दोगे
इस माटी को वचन दिया था, देश नही मिटने दोगे

ये सौगंध उठा कर तुमने, वंदे मातरम बोला था
जिस को सुनकर दिल्ली का, सत्ता सिंहासन डोला था

आस जगी थी किरणों की, लगता था अंधकार खो जायेगा
काश्मीर की पीड़ा का , अब समाधान हो जायेगा

जाग उठे कश्मीरी पंडित, और विस्थापित जाग उठे
जो हिंसा के मारे थे , वे सब निर्वासित जाग उठे

नई दिल्ली से जम्मु तक, सब मोदी मोदी दिखता था
कितना था अनुकूल समय, जो कभी विरोधी दिखता था

फिर ऐसी क्या बात हुई, जो तुम विश्वास हिला बैठे
जो पाकिस्तान समर्थक हैं, तुम उनसे हाथ मिला बैठे

गद्दी पर आते ही उसने, रंग बदलना शुरू किया
पहली प्रेस वार्ता से ही, जहर उगलना शुरू किया

जिस चुनाव को खेल जान पर, सेना ने करवाया है
उस चुनाव का सेहरा उसने, पाक के सिर बंधवाया है

संविधान की उड़ा धज्जियां,अलगावी स्वर बोल दिए
जिनमें आतंकी बंद थे , वे सब दरवाजे खोल दिए

अब बोलो क्या रहा शेष,बोलो क्या मन में ठाना है
देर अगर हो गयी समझ लो,जीवन भर पछताना है

गर भारत की धरती पर,आतंकी छोड़े जायेगें
तो लखवी के मुद्दे पर, दुनिया को क्या समझायेंगे

घाटी को दरकार नही है, नेहरू वाले खेल की
यहां मुखर्जी की धारा हो ,नीति चले पटेल की

अब भी वक़्त बहुत बाकी है, अपनी भूल का सुधार करो
ये फुंसी नासूर बने ना, जल्दी से उपचार करो

जिस शिव की नगरी से जीते,उस शिव का तुम कुछ ध्यान करो
इस मंथन से विष निकला है, आगे बढ़ कर पान करो

गर मैं हूं भक्त तुम्हारा तो, अधिकार मुझे है लड़ने का
नही इरादा है कोई, अपमान तुम्हारा करने का

केवल याद दिलाना तुमको, वही पुराना नारा है
जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है।।

वंदेमातरम

लक्ष्य तक पहुंचे बिना, पथ मे पथिक विश्राम कैसा! पथ मे पथिक विश्राम कैसालक्ष्य है अति दूर दुर्गम, मार्ग है हम जानते है,कि...
13/04/2015

लक्ष्य तक पहुंचे बिना, पथ मे पथिक विश्राम कैसा!
पथ मे पथिक विश्राम कैसा
लक्ष्य है अति दूर दुर्गम, मार्ग है हम जानते है,
किंतु पथ के कंटको को हम सुमन ही मानते है,
जब प्रगति का नाम जिवन है, यह अकाल विराम कैसा
धनुष से जो छुटता वह, बाण कब मग मे ठहरता,
देखते ही देखते वह लक्ष्य का वेध करता,
लक्ष्य प्रेरित बाण है, हम ठहरने,ठहरने का काम कैसा
बाल रवि की स्वर्ण किरणे,निमिष मे भू पर पहुचती,
कालिमा का नाश करती,ज्योति जग-मग जगत करती,
ज्योति के चिर पुंज है हम को अमा से काम कैसा!!
आज पहले से निकट है, देख लो वह लक्ष्य अपना,
पग बढाते ही चलो बस, सत्य होगा शिघ्र सपना,
धर्म पथ के पथिक को फिर दैव,दक्षिण वाम कैसा!!

"जिंदगी है छोटी," हर पल में खुश हूं"काम में खुश हूं," आराम में खुश हू"आज पनीर नहीं," दाल मेंही खुश हूं"आज गाड़ी नहीं," प...
12/04/2015

"जिंदगी है छोटी," हर पल में खुश हूं
"काम में खुश हूं," आराम में खुश हू
"आज पनीर नहीं," दाल में
ही खुश हूं
"आज गाड़ी नहीं," पैदल
ही खुश हूं
"दोस्तों का साथ नहीं," अकेला ही खुश हूं
"आज कोई नाराज है," उसके इस अंदाज से ही खुश हूं
"जिस को देख नहीं सकता," उसकी आवाज
से ही खुश हूं
"जिसको पा नहीं सकता," उसको सोच कर
ही खुश हूं
"बीता हुआ कल जा चुका है,"
उसकी मीठी याद में
ही खुश हूं
"आने वाले कल का पता नहीं," इंतजार में
ही खुश हूं
"हंसता हुआ बीत रहा है पल," आज में
ही खुश हूं
"जिंदगी है छोटी," हर पल में खुश हूं
"अगर दिल को छुआ, तो जवाब देना"
"वरना बिना जवाब के भी खुश हूं

12/04/2015

मत सोच की तेरा सपना क्यों पूरा नहीं होता.....
हिम्मत वालो का इरादा कभी अधुरा नहीं होता....
जिस इंसान के कर्म अच्छे होते है...
उस के जीवन में कभी अँधेरा नहीं होता...

चलता रहा हु अग्निपथ पर...चलता चला जाऊँगा.. हिन्दू बन कर जन्म लिया मैंने... हिन्दू बन कर ही मर जाऊंगा...श्री राम की संतान...
12/04/2015

चलता रहा हु अग्निपथ पर...
चलता चला जाऊँगा..
हिन्दू बन कर जन्म लिया मैंने...
हिन्दू बन कर ही मर जाऊंगा...
श्री राम की संतान हूँ...
रुकना मैंने सीखा नहीं ...
महाकाल का भक्त हूँ...
झुकना मैंने सीखा नही...
ह्रदय में जो धड़क रहा है...
वो धड़कन तेरे नाम का...
रगो में जो बह रहा है...
वो लहू है श्री राम का... ।।
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(जय श्री राम )

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