12/09/2025
कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित 6,638 मीटर ऊँचा एक पवित्र पहाड़ है, जिसे हिंदू, बौद्ध, जैन और बॉन धर्मों के अनुयायी पूजते हैं. यह भगवान शिव का निवास स्थान है, दुनिया का केंद्र माना जाता है, और यहाँ कई नदियों का उद्गम होता है. इसकी अनूठी पिरामिड जैसी आकृति है और इसे आज तक किसी इंसान द्वारा चढ़ाई नहीं की गई है. वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों ही इसके रहस्यों को समझने की कोशिश करते हैं.
भौगोलिक स्थिति और विशेषताएँ
स्थान: यह तिब्बत के न्गारी प्रान्त में, ट्रांसहिमालय की गंगदिसे शान पर्वत श्रृंखला में स्थित है.
ऊँचाई: इसकी ऊँचाई लगभग 6,638 मीटर (21,778 फीट) है.
आकृति: यह दूर से एक पिरामिड जैसा दिखता है.
नदियों का उद्गम: कैलाश पर्वत से सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र और कर्णाली जैसी चार प्रमुख एशियाई नदियों का उद्गम होता है, जो इसे लाखों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण जलस्रोत बनाता है.
धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म: इसे भगवान शिव और पार्वती का निवास स्थान माना जाता है, जो स्वर्ग और आत्माओं का अंतिम गंतव्य है.
बौद्ध धर्म: तिब्बती बौद्ध धर्म में इसे मेरु पर्वत, या पृथ्वी का केंद्र कहा जाता है.
जैन धर्म: जैन धर्म में इसे अष्टपद पर्वत कहते हैं, जहाँ पहले तीर्थंकर ऋषभदेव ने मोक्ष प्राप्त किया था.
बॉन धर्म: बॉन धर्म के लोग इसे नौ मंजिला स्वस्तिक पर्वत मानते हैं, जो आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र है.
पर्वत से जुड़े रहस्य और मान्यताएँ
अप्राप्य शिखर: कैलाश पर्वत पर आज तक कोई भी सफलतापूर्वक चढ़ाई नहीं कर पाया है, और किसी भी पर्वतारोही को सफलता नहीं मिली है.
चुंबकीय ऊर्जा: ऐसा माना जाता है कि यहाँ एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र है, जो चढ़ाई को असंभव बनाता है.
आध्यात्मिक अनुभव: कुछ लोग यहां समय की गति में बदलाव महसूस करते हैं और कहा जाता है कि उनके बाल और नाखून तेजी से बढ़ने लगते हैं.
परिक्रमा: हर साल लाखों तीर्थयात्री कैलाश पर्वत की परिक्रमा करने आते हैं.