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"Give a Man a fish and you feed him for a day; teach a Man to fish and you feed him for lifetime."

कुछ जंगल की कहानियाँ कुछ जंगल का ट्रेवल...15 साल से ज्यादा वन्यजीव पर्यटन का अनुभव है, डॉ आकाश ने जिम कॉबेट पर दो किताबें भी लिखी है!आप जिम कॉबेट,रंथम्बोर,सरिस्का,पेंच,कान्हा अन्य जैसे जगहों की सफारी व रिसोर्ट, अयोध्या, वाराणसी व प्रयागराज के भी पैकेज है The motive behind the establishment of KHAAS is to uplift and provide confidence to a deprived community. The ideology is to provide livelihood r

ather than donations and help the community to find a permanent solution. Many rehabilitation support initiatives by NGO’s focus on social and psychological rehabilitation of the victims. There are very few who provide them opportunities to earn a dignified livelihood, every day an idea of establishing an NGO is born and perhaps every week an NGO starts their noble work; but our focus should not be to provide them help in the form of donations. We need to fuel them with real life opportunities and entrust them with our confidence. KHAAS believes in this ideology of training their employees to stand up for themselves and build a living for themselves on their own.

  इतनी हरयाली,रामनगर में क्यारी गाँव एक वह जगह है जहाँ आपको जाने के लिए पुरे 7 किलोमीटर का जंगल का रास्ता पार करके जाना ...
30/08/2026

इतनी हरयाली,रामनगर में क्यारी गाँव एक वह जगह है जहाँ आपको जाने के लिए पुरे 7 किलोमीटर का जंगल का रास्ता पार करके जाना होता, यह गॉव चारो तरफ से जंगल से घिरा है,क्यारी गाँव अपने आप में बहुत सा इतिहास समेटा हुआ है, वन्यजीव के बसेरे के साथ यहाँ आपको दो नदी भी मिलती है जिनका नाम दाबका और खिचड़ी है, अकेले क्यारी में ही 3 मंदिर ऐसे है जो की घने जंगल में है जहाँ पहुंचना भी हर किसी के वश में नहीं है, छोटी छोटी टपरी, टहलते गॉव वाले, प्राचीन समय की बनी नहर में बहते पानी की आवाज़, सुंदर ट्रेक दूर दिखते पहाड़ ऐसी है अपनी क्यारी!, और यह जो रिसोर्ट आप देख रहे है इससे 200 मीटर पर नदी हैं...यहाँ आने का रास्ता है पूरा जंगल का 7 किलोमीटर का हैं और जब हम इस 7 किलोमीटर की रोड चल रहें होंगे तो ,जब एहसास होगा जिम कॉर्बेट के जंगलों की सुंदरता का,क्योंकि इसी 7 किलोमीटर के रास्ते पर न जाने कितनी दीमक की बांबियां और साल के ऊंचे ऊंचे पेड़, और अचानक से हिरना का झुंड आ जाना, जंगल में चलते-चलते अचानक मानसून नदी का आ जाना, और इस नदी के पर दिखता आपका रिजॉर्ट, तो एक दिन तो बताइए इस जंगल में जहां आपको भरपूर वाइल्डलाइफ देखने के पूरे पूरे चांस होते हैं


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Alaya Resort, Kyari Village, Ramnagar uttarakhand
Jim Corbett
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जहाँ जंगल की खामोशी में आज भी सुनाई देती है विराट पत्तन की कहानी… 🙏🕉️रामनगर से ढिकुली की ओर बढ़ते हुए जब रास्ता धीरे-धीर...
29/08/2026

जहाँ जंगल की खामोशी में आज भी सुनाई देती है विराट पत्तन की कहानी… 🙏🕉️

रामनगर से ढिकुली की ओर बढ़ते हुए जब रास्ता धीरे-धीरे जंगलों और प्रकृति की गोद में समाने लगता है, तो यह यात्रा केवल एक मंदिर तक पहुँचने की यात्रा नहीं रह जाती… यह यात्रा हमें उस इतिहास की ओर ले जाती है, जिसके निशान आज भी इस धरती में कहीं न कहीं सांस लेते हुए महसूस होते हैं।

यही है ढिकुली का पवित्र क्षेत्र, जिसे प्राचीन विराट पत्तन या वैराटपत्तन से जोड़ा जाता है। कहते हैं कि यह भूमि कभी एक समृद्ध और महत्वपूर्ण नगरी रही होगी। आज जंगलों, नदियों और पहाड़ियों के बीच खड़े होकर जब हम इस क्षेत्र को देखते हैं, तो मन में एक ही सवाल उठता है—आखिर इस धरती ने कितने युग देखे होंगे?

इसी पावन और ऐतिहासिक परिवेश में स्थित है गरल कंठेश्वर महादेव मंदिर—एक ऐसा शिवधाम, जहाँ आकर केवल दर्शन नहीं होते, बल्कि मन को एक अलग ही शांति का अनुभव होता है।

घंटियों की आवाज़, जंगल की खामोशी और भगवान शिव के चरणों में झुका हुआ श्रद्धालु… यह दृश्य मानो हमें आधुनिक दुनिया की भागदौड़ से निकालकर सदियों पुराने भारत से जोड़ देता है।

इस क्षेत्र को लेकर स्थानीय मान्यताओं और जनश्रुतियों में महाभारत काल तथा राजा विराट की नगरी से भी संबंधों की बातें कही जाती हैं। लेकिन इतिहास और आस्था के बीच सबसे खूबसूरत बात शायद यही है कि कुछ स्थान ऐसे होते हैं जिन्हें केवल किताबों में पढ़कर नहीं समझा जा सकता…

उन्हें महसूस करना पड़ता है।

ढिकुली की यह धरती भी ऐसी ही है।

आज जब दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है, जंगलों के बीच बसे ऐसे मंदिर हमें याद दिलाते हैं कि हमारी असली विरासत केवल बड़ी इमारतों और चमकते शहरों में नहीं है… वह उन छोटे मंदिरों, पुराने पत्थरों, लोककथाओं और जंगलों में भी छिपी है, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

गरल कंठेश्वर महादेव के दर्शन करते हुए बस एक ही भावना मन में आती है—

“सभ्यताएँ बदल गईं, रास्ते बदल गए, लोग बदल गए… लेकिन इस धरती की आस्था आज भी वैसी ही खड़ी है।”

अगर आप कभी रामनगर और ढिकुली के जंगलों की ओर जाएँ, तो केवल जंगल और रिसॉर्ट देखकर वापस मत लौटिएगा…

कुछ देर इस इतिहास को भी सुनिएगा।

क्योंकि हो सकता है…

जंगल की खामोशी में आज भी विराट पत्तन की कोई कहानी आपका इंतज़ार कर रही हो। 🙏🕉️

जगह - गरल कंठेश्वर महादेव, वैराट पटन, ढीकुली, रामनगर, जिम कॉबेट, उत्तराखंड

यहाँ कोई भी पर्यटक, श्रद्धांलु आराम से जा सकते है, रोड़ से इसकी दुरी लगभग 1 किलोमीटर अंदर जंगल मे है

जिस शहर में आज पानी बोतल में बिकता है…कभी उसी दिल्ली में पानी कंधे पर चलता था।कंधे पर चमड़े की एक भारी-सी मशक,पसीने से भ...
28/08/2026

जिस शहर में आज पानी बोतल में बिकता है…
कभी उसी दिल्ली में पानी कंधे पर चलता था।

कंधे पर चमड़े की एक भारी-सी मशक,
पसीने से भीगा चेहरा और आवाज़—

“पानी… ठंडा पानी…”

ये आवाज़ कभी पुरानी दिल्ली की गलियों का हिस्सा हुआ करती थी।

मशकवाला…
जिसे आज शायद हमारी पीढ़ी पहचानती भी नहीं।

जब दिल्ली में हर गली में नल नहीं हुआ करते थे, जब गर्मी में एक घूंट ठंडा पानी किसी नेमत से कम नहीं होता था, तब यही लोग अपनी मशक में पानी भरकर गलियों और बाजारों में घूमते थे।

कभी किसी मुसाफिर की प्यास बुझाते,
कभी किसी दुकानदार को पानी देते,
और कभी किसी ऐसे इंसान को पानी पिलाते जिसे वे जानते तक नहीं थे।

उनके पास फ्रिज नहीं था…
मगर उनके पास इंसानियत थी।

आज पानी हमारे घर की एक उंगली की दूरी पर है।
लेकिन उस दौर में किसी प्यासे तक पानी पहुँचाने के लिए किसी इंसान को अपनी पीठ पर कई किलो वजन उठाकर धूप में चलना पड़ता था।

वक्त बदला…
नल आए, पाइपलाइन आई, बोतलबंद पानी आया…
और धीरे-धीरे मशकवाला दिल्ली की गलियों से गायब होता चला गया।

लेकिन इतिहास की खूबसूरती यही है—
कुछ लोग चले जाते हैं,
उनकी कहानियाँ नहीं जातीं।

आज अगर पुरानी दिल्ली की किसी गली में मशक लिए कोई बुजुर्ग दिखाई दे जाए, तो उसे सिर्फ एक आदमी मत समझिएगा…

वह चलता-फिरता इतिहास है।

क्योंकि कभी दिल्ली की प्यास बुझाने वाले इन लोगों ने शायद हमें एक बहुत बड़ी बात सिखाई थी—

“इंसान की सबसे बड़ी पहचान यह नहीं कि उसके पास कितना है…
बल्कि यह है कि वह किसी प्यासे को कितना दे सकता है।”

#मशकवाला #मशक #भिश्ती #भूलीबिसरीकहानियां #दिल्लीकाइतिहास #पुरानीदिल्ली #इतिहास #मानवता

आगे अंधेरी सुरंग थी… और पीछे मौत की रफ्तार से आती ट्रेन!छत्तीसगढ़ के बिलासपुर–कटनी रेलमार्ग की भनवारटंक टनल में एक ऐसा द...
27/08/2026

आगे अंधेरी सुरंग थी… और पीछे मौत की रफ्तार से आती ट्रेन!
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर–कटनी रेलमार्ग की भनवारटंक टनल में एक ऐसा दृश्य कैमरे में कैद हुआ, जिसने हर Wildlife Lover का दिल रोक दिया…

रेलवे ट्रैक पर एक तेंदुआ बेखौफ चलता हुआ दिखाई दिया। उसके सामने अंधेरी सुरंग… नीचे लोहे की पटरी… और उसी रास्ते पर इंसानों की दुनिया की सबसे तेज मशीनों में से एक—ट्रेन!

शायद उस तेंदुए को नहीं पता था कि जिस रास्ते पर वह चल रहा है, वह जंगल का रास्ता नहीं है…

लेकिन उस पल इंसान ने भी अपना फर्ज निभाया। ट्रेन की रफ्तार कम की गई, ताकि जंगल के इस खूबसूरत मेहमान को कोई नुकसान न पहुंचे। 🙏🐆

सोचिए…

जंगल उसका था, लेकिन रास्ते हमने बना लिए।
पहाड़ उसके थे, लेकिन सुरंगें हमने बना लीं।
धरती उसकी भी थी… लेकिन सीमाएं हमने खींच दीं।

और फिर जब कोई जंगली जानवर हमारी बनाई हुई दुनिया में भटक जाता है, तो हम कहते हैं—

“जानवर आबादी में आ गया…”

शायद सवाल यह होना चाहिए…

क्या जानवर हमारी दुनिया में आया है,
या हम उसकी दुनिया के बहुत अंदर तक चले गए हैं? 💔🌿

यह सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं है…

यह हमें याद दिलाता है कि विकास जरूरी है, लेकिन जंगल और जंगल के असली मालिकों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

🐆❤️ क्योंकि जिस दिन जंगल खामोश हो गए, उस दिन हमारी दुनिया भी पहले जैसी नहीं रहेगी…

क्या आप भी मानते हैं कि जंगलों से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक और हाईवे पर Wildlife की सुरक्षा के लिए और बेहतर इंतजाम होने चाहिए?



घटना 27 अगस्त 2026 को भनवारटंक क्षेत्र के बिलासपुर–कटनी रेलमार्ग पर रिपोर्ट हुई, जहां तेंदुआ रेलवे ट्रैक और सुरंग के पास दिखाई दिया; खबरों के अनुसार ट्रेन को धीमा किया गया।

I am Sorry हम तुझे बचा नहीं पाए..भोला… तू सिर्फ़ एक बाघ नहीं था, मेरी यादों का एक हिस्सा था। 🐅💔 फाटोजोन का सबसे मशहूर बा...
26/08/2026

I am Sorry हम तुझे बचा नहीं पाए..भोला… तू सिर्फ़ एक बाघ नहीं था, मेरी यादों का एक हिस्सा था। 🐅💔 फाटोजोन का सबसे मशहूर बाघ भोला आज इस दुनिया को छोड़कर चला गया।

ये शब्द लिखते हुए सच कहूँ… मेरे हाथ रुक रहे हैं और आँखें नम हैं।
गूसबंप हो रहे हैं… क्योंकि भोला मेरे लिए सिर्फ़ जंगल में दिखाई देने वाला एक टाइगर नहीं था।

मैंने उसे छोटे से बड़ा होते हुए देखा था।
उसके चेहरे की मासूमियत से लेकर उसकी आँखों में आई वह गहरी शान तक… मैंने भोला को बदलते हुए अपनी आँखों के सामने देखा था।

कॉर्बेट से मेरा रिश्ता आज का नहीं है।
सालों से इस जंगल में आना-जाना रहा है, जंगल में काम किया है, अनगिनत बाघ देखे हैं… लेकिन अगर कोई पूछे कि किस बाघ से सबसे ज्यादा भावनात्मक रिश्ता रहा?
तो मेरे पास बिना सोचे सिर्फ़ एक नाम होगा—

भोला।

भोला से जुड़ी ना जाने कितनी कहानियाँ हैं मेरे पास।
कितनी सुबहें… कितनी शामें… कितनी सफ़ारियाँ…
कितनी बार अचानक जंगल की किसी मोड़ पर उसका दिख जाना और फिर कुछ सेकंड के लिए सब कुछ भूलकर सिर्फ़ उसे देखते रह जाना।

कभी वह रास्ते पर शान से चलता था…
कभी झाड़ियों के पीछे से सिर्फ़ उसकी आँखें दिखाई देती थीं…
और कभी वह ऐसे सामने आ जाता था जैसे जंगल खुद कह रहा हो—
“लो, आज भोला से मिल लो…”मैंने उसकी तस्वीरें लीं।उसके किस्से सुनाए।ससे जुड़ी यादें लोगों तक पहुँचाईं।
और शायद इसी वजह से भोला मेरे लिए एक टाइगर से कहीं ज्यादा बन गया था।लेकिन आज…वही भोला नहीं रहा।

घायल होने के बाद उसका उपचार चल रहा था।
हम सब उम्मीद लगाए बैठे थे कि शायद वह फिर उठेगा…
फिर जंगल की उसी पगडंडी पर चलेगा…
फिर कोई सफारी उसके सामने रुकेगी…
और कोई धीमी आवाज़ में कहेगा—

“देखो… भोला है।”लेकिन जंगल ने आज हमसे उसकी आख़िरी मुलाक़ात करवा दी।

भोला, I'm so sorry…हम तुझे बचा नहीं पाए। 💔

शायद इंसान होने की सबसे बड़ी बेबसी यही है कि हम किसी को बचाने की पूरी कोशिश करते हैं…
लेकिन कभी-कभी प्रकृति अपना फैसला सुना देती है।
आज फाटोजोन का जंगल वही है…वही पेड़ हैं… वही रास्ते हैं… वही हवा है…

बस एक कमी हमेशा खलेगी—अब उन रास्तों पर भोला नहीं चलेगा।
और शायद आने वाले सालों में जब भी फाटोजोन की बात होगी,
जब कोई उस जंगल के सबसे मशहूर बाघ का नाम पूछेगा,
तो जंगल की कहानियों में एक नाम हमेशा जिंदा रहेगा—

भोला।तू चला गया है दोस्त…
लेकिन यकीन मान, तू हमारी यादों से कभी नहीं जाएगा।
तेरी वो चाल…तेरी वो आँखें…तेरी वो तस्वीरें…तेरे वो किस्से…सब यहीं रहेंगे। चिरंजीवी रहेगा… हमारी यादों में।जहाँ भी रहे, खुश रहे।
जंगल की उस दुनिया में रहे जहाँ कोई दर्द नहीं होता।
Rest in Peace, भोला। 🐅

आज एक बाघ नहीं गया…
आज जंगल की एक कहानी खत्म हुई है।और कुछ कहानियाँ खत्म होकर भी कभी खत्म नहीं होतीं…

भोला उन्हीं कहानियों में से एक है।

रानीखेत में 100 से ज्यादा पुराना है यह हेरिटेज होटल, जिसके हर चीज में 100 साल से ज्यादा पुराना एहसास... होटल की जानकारी ...
26/08/2026

रानीखेत में 100 से ज्यादा पुराना है यह हेरिटेज होटल, जिसके हर चीज में 100 साल से ज्यादा पुराना एहसास... होटल की जानकारी 👇
#रानीखेत की सुंदर वादिओं में मॉल रोड़ पर बना सन 1908 में बना यह एक हेरिटेज होटल है, जिसमे अभी भी 200 साल से पुरानी बेशकीमती चीजे मौजूद है रानीखेत की सुन्दर वादियों और घने जंगल के बिच बना है यह हेरिटेज रिसोर्ट जहाँ आप अपने आप को ही भूल जायेंगे और कुछ समय के लिए अतीत में अजायँगे,आर्मी का अनुशासन व कुदरत की सुंदरता के मिश्रण का नाम है " रानीखेत"..... जहाँ बहुत बड़ी मॉल रोड़ तो नही पर मन एक बार में छप जाने वाले कुदरत के नजारे है , आर्मी के दौड़ते हुए जवान और कुदरत के नजारो के लिए चले आईये आप भी रानीखेत उत्तराखंड में.....

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उदयपुर में एक ऐसा कमरा… जहाँ लगेगा जैसे चट्टान के अंदर ठहरे हों! उदयपुर की खूबसूरती सिर्फ झीलों और महलों तक सीमित नहीं ह...
25/08/2026

उदयपुर में एक ऐसा कमरा… जहाँ लगेगा जैसे चट्टान के अंदर ठहरे हों! उदयपुर की खूबसूरती सिर्फ झीलों और महलों तक सीमित नहीं है। Dan Center Parijat Villas में एक ऐसा खास रूम है, जहाँ कदम रखते ही आपको लगेगा जैसे आप किसी प्राकृतिक चट्टान के भीतर आ गए हों।

लेकिन सबसे खास बात—इस रॉक-इंस्पायर्ड लग्ज़री रूम के साथ साथ कई विला ऐसे भी है जिसमे प्राइवेट पूल। यानी एक तरफ चट्टान जैसा अनोखा इंटीरियर और दूसरी तरफ आपकी अपनी निजी पूल वाली लग्ज़री… ऐसा अनुभव जो होटल में ठहरने से कहीं ज्यादा खास बन जाता है।अगर उदयपुर आ रहे हैं, तो इस जगह को सिर्फ स्टे मत समझिए…यहाँ एक रात बिताना भी आपकी पूरी यात्रा की सबसे खूबसूरत याद बन सकता है।

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Resort - Dan Center Parijat Villas
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असीरगढ़ किला—जहाँ आज भी अश्वत्थामा के आने की कहानी सुनाई जाती है! मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के पास पहाड़ी पर खड़ा असीरगढ़...
25/08/2026

असीरगढ़ किला—जहाँ आज भी अश्वत्थामा के आने की कहानी सुनाई जाती है! मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के पास पहाड़ी पर खड़ा असीरगढ़ किला इतिहास की एक ऐसी कहानी अपने अंदर समेटे हुए है, जिसे सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

स्थानीय मान्यता है कि महाभारत के अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं और भटकते हुए इस इलाके में आते हैं। कहा जाता है कि किले के आसपास मौजूद एक प्राचीन शिव मंदिर में वे सुबह-सुबह पूजा करने आते हैं।

अब जरा सोचिए…
एक हजारों साल पुरानी महाभारत की कथा…
एक वीरान पहाड़ी…
सदियों पुराना किला…
और एक ऐसी मान्यता कि आज भी कोई अज्ञात व्यक्ति मंदिर में पूजा करके चला जाता है! 😨

कुछ स्थानीय लोग ऐसी रहस्यमयी बातें बताते हैं कि सुबह मंदिर में पूजा के निशान दिखाई देते हैं, जबकि रात में वहाँ कोई दिखाई नहीं देता।

लेकिन असली सवाल यही है—

क्या सच में अश्वत्थामा आज भी इस धरती पर भटक रहे हैं?
या फिर यह सदियों से चली आ रही एक रहस्यमयी लोककथा मात्र है?

सच जो भी हो…
असीरगढ़ की सुनसान पहाड़ियों पर खड़े होकर जब कोई इस कहानी को याद करता है, तो इतिहास और रहस्य के बीच की रेखा कुछ धुंधली-सी जरूर लगने लगती है। 👻

आप क्या मानते हैं—अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं या यह सिर्फ एक कहानी है? 👇

🔱 ताड़केश्वर महादेव — जहाँ जंगल भी शिव का नाम लेता है!उत्तराखंड के घने देवदार के जंगलों के बीच बसा ताड़केश्वर महादेव सिर...
24/08/2026

🔱 ताड़केश्वर महादेव — जहाँ जंगल भी शिव का नाम लेता है!उत्तराखंड के घने देवदार के जंगलों के बीच बसा ताड़केश्वर महादेव सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि प्रकृति और आस्था का ऐसा संगम है जहाँ पहुँचते ही मन अपने आप शांत होने लगता है।

कहा जाता है कि यह वही पवित्र स्थान है जहाँ भगवान शिव ने ताड़कासुर का वध किया था। मंदिर के चारों ओर फैले देवदार के पेड़, ठंडी हवा और जंगल की खामोशी इस जगह को किसी रहस्यमयी दुनिया जैसा बना देते हैं।

यहाँ घंटियों की आवाज़ जब देवदार के जंगलों में गूंजती है, तो ऐसा लगता है जैसे पूरा जंगल भोलेनाथ के नाम का जाप कर रहा हो।

शायद यही वजह है कि ताड़केश्वर महादेव आने वाला इंसान सिर्फ दर्शन करके वापस नहीं लौटता…
वह अपने भीतर एक अजीब-सी शांति लेकर लौटता है।

हर हर महादेव! 🙏🔱

जगह - ताड़केश्वर महादेव, लैंसडौन डिवीज़न, उत्तराखंड
Shri Tadkeshwar Dham Mandir, Lansdowne, Lansdowne, Malara Bara, Uttarakhand 246155
https://maps.app.goo.gl/ct8ebcwqt23hhJ1x9?g_st=ac



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"वो सुबह... जो एक पक्षी विशेषज्ञ की आख़िरी सुबह बन गई!"22 फ़रवरी 1985...जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान की सुबह बिल्कुल वैस...
21/08/2026

"वो सुबह... जो एक पक्षी विशेषज्ञ की आख़िरी सुबह बन गई!"
22 फ़रवरी 1985...जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान की सुबह बिल्कुल वैसी ही थी, जैसी हर प्रकृति प्रेमी अपने सपनों में देखता है।

घने साल के जंगल...हल्की ठंड...पेड़ों पर गूंजती पक्षियों की मधुर आवाज़ें...और दूर तक फैली ऐसी खामोशी, जिसे केवल जंगल ही रच सकता है।

लेकिन उस दिन इस खामोशी के पीछे एक ऐसा शिकारी भी मौजूद था, जिसे किसी ने नहीं देखा था...

उसी सुबह इंग्लैंड के प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ डेविड बैसिल हंट (David Bassil Hunt) अपने कैमरे और दूरबीन के साथ जंगल में निकले थे। दुनिया के कई देशों में दुर्लभ पक्षियों का अध्ययन कर चुके डेविड के लिए यह एक और रोमांचक दिन था। उनका ध्यान केवल पक्षियों की ओर था—किस डाल पर कौन-सी चिड़िया बैठी है, किस दिशा से उसकी आवाज़ आ रही है...

वे धीरे-धीरे जंगल के भीतर बढ़ते गए।..हर कुछ कदम पर रुकते...आसमान की ओर देखते...कैमरे का फोकस ठीक करते...और फिर आगे बढ़ जाते।...उन्हें शायद बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि जंगल में कोई और भी उनकी हर गतिविधि पर नज़र रखे हुए है।

जंगल का एक नियम है...आपको लगे कि आप अकेले हैं, लेकिन जंगल में आप कभी अकेले नहीं होते।

कहा जाता है कि कुछ ही क्षण बाद परिस्थितियाँ अचानक बदल गईं। सामने एक बंगाल टाइगर था।

फिर...कुछ सेकंड...एक तेज़ हलचल...और सब कुछ बदल गया।

हमला इतना अचानक हुआ कि संभलने का अवसर ही नहीं मिला। साथ मौजूद लोगों ने पूरी कोशिश की, लेकिन उस दिन जंगल ने अपने सबसे अनुभवी मेहमानों में से एक को हमेशा के लिए खो दिया।

22 फ़रवरी 1985 को डेविड बैसिल हंट की बाघ के हमले में मृत्यु हो गई।

इस घटना ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के बर्डवॉचिंग समुदाय को झकझोर दिया। एक ऐसा व्यक्ति, जिसने अपना पूरा जीवन प्रकृति को समझने और लोगों को उससे जोड़ने में बिताया, उसी प्रकृति की गोद में अपनी अंतिम यात्रा पर निकल गया।

आज भी यह घटना हमें एक गहरी सीख देती है।...जंगल खूबसूरत है...लेकिन वह किसी इंसान का नहीं, वन्यजीवों का घर है।

हम वहाँ मेहमान बनकर जाते हैं। इसलिए हर कदम पर सतर्कता, गाइड के निर्देशों का पालन और वन्यजीवों की दूरी का सम्मान करना बेहद ज़रूरी है।

और शायद इसी वजह से अनुभवी वनकर्मी अक्सर कहते हैं—

"जंगल में सबसे बड़ा भ्रम यह होता है कि आपको लगता है सब कुछ शांत है... जबकि जंगल आपको आपसे पहले देख चुका होता है।"

जंगल का सम्मान कीजिए, नियमों का पालन कीजिए... क्योंकि एक छोटी-सी लापरवाही ज़िंदगी भर का पछतावा बन सकती है।

कृपया ध्यान दें यह फोटो असली बाघ की नहीं है...

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