08/11/2025
सरकार ने 8वे वेतन आयोग को पेंशनर के लिए निम्न निर्देश दिए ---
“While making recommendations, the Commission shall take into account the unfunded cost of non-contributory pension schemes.”
— 8th Central Pay Commission, ToR f(iii)
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अब इसे सरल भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है
🔹 . “Non-contributory pension” का मतलब क्या होता है?
Non-contributory pension का अर्थ होता है —
ऐसी पेंशन योजना जिसमें कर्मचारी अपनी तनख्वाह से कोई अंशदान (contribution) नहीं देता।
पूरा खर्चा सरकार उठाती है।
🔸 उदाहरण:
• पुराने सरकारी कर्मचारियों की Old Pension Scheme (OPS)।
इसमें न तो कर्मचारी योगदान करता है, न कोई पेंशन फंड अलग बनता है।
सेवा के बाद पूरी पेंशन सरकार सीधे अपने खजाने से देती है।
इसलिए इसे “non-contributory” (अंशदान रहित) कहा जाता है।
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🔹 “Unfunded cost” का क्या मतलब है?
Unfunded cost का मतलब —
सरकार के पास इस पेंशन का भुगतान करने के लिए कोई तैयार फंड नहीं है,
और जब भी पेंशन देनी होती है,
वह पैसा सीधे सरकारी राजस्व (tax collections) से दिया जाता है।
🔸 यानी —
यह एक ऐसा खर्च है जो हर साल सरकार के बजट पर “नए बोझ” के रूप में आता है।
इस पर ब्याज या रिज़र्व जैसी कोई फंडिंग नहीं की गई होती।
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🔹 . इस लागत की समस्या क्या है?
1. सरकार का राजकोषीय दबाव (Fiscal burden) बढ़ता जाता है —
हर साल पेंशनरों की संख्या बढ़ने से यह “स्थायी खर्च” लगातार बढ़ता है।
2. कोई निवेश नहीं, केवल भुगतान —
जब कर्मचारी से कोई योगदान नहीं लिया जाता, तो भविष्य के लिए कोई पेंशन फंड नहीं बनता।
3. भविष्य की पीढ़ियों पर बोझ —
आज के टैक्स देने वाले नागरिकों का पैसा उन रिटायर कर्मचारियों को देने में जाता है, जिनके लिए पहले कोई बचत नहीं रखी गई।
4. राज्य सरकारों पर दोहरा असर —
केंद्र अगर नॉन-कॉन्ट्रिब्यूटरी मॉडल अपनाता है (जैसे OPS को बहाल करना), तो राज्य भी दबाव में आते हैं, जिससे राज्यों की वित्तीय स्थिति बिगड़ सकती है।
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🔹 8वें वेतन आयोग के लिए इसका महत्व
सरकार ने आयोग को स्पष्ट रूप से कहा है कि जब वह वेतन, भत्ते या पेंशन संबंधी सिफारिशें करे,
तो उसे इन “अनफंडेड नॉन-कॉन्ट्रिब्यूटरी पेंशन योजनाओं” के भारी खर्च का ध्यान रखना होगा।
इसका मतलब है:
• आयोग Old Pension Scheme (OPS) या उसके समान किसी गैर-अंशदायी पेंशन पर खुले हाथ से सिफारिश नहीं कर सकता,
• उसे यह देखना होगा कि ऐसे खर्चे देश की अर्थव्यवस्था और बजट पर कितना बोझ डालेंगे,
• यानी आयोग वित्तीय अनुशासन (fiscal prudence) को प्राथमिकता देगा।
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🔹 व्यावहारिक असर (Practical impact)
क्या असर पड़ सकता है
💰 पेंशन नीति पर
OPS को पुनर्जीवित करने या बढ़ाने के प्रति आयोग सावधानीपूर्ण रहेगा।
📈 वेतन वृद्धि पर
वेतन वृद्धि भी सीमित दायरे में रखी जा सकती है, ताकि भविष्य की पेंशन देनदारियाँ (liabilities) न बढ़ें।
🧮 राज्य वित्त पर
आयोग ध्यान देगा कि राज्यों की पेंशन देनदारियाँ पहले से बहुत बढ़ चुकी हैं।
📊 NPS बनाम OPS तुलना
आयोग यह संकेत दे सकता है कि Contributory system (जैसे NPS) दीर्घकाल में ज़्यादा टिकाऊ (sustainable) है
सरल शब्दों में निष्कर्ष
सरकार चाहती है कि 8वाँ वेतन आयोग यह समझे कि —
“अगर कर्मचारियों की पेंशन पूरी तरह सरकार पर निर्भर (बिना अंशदान) रहेगी, तो यह भविष्य में बहुत बड़ा आर्थिक बोझ बन सकता है।”
इसलिए आयोग को ऐसी सिफारिशें करनी हैं जो वेतन और पेंशन में संतुलन लाएँ,
ताकि कर्मचारियों का हित भी रहे और देश की अर्थव्यवस्था पर भार भी न बढ़े।
अतः मेरा सभी रिटायर्ड साथियों से अनुरोध /निवेदन है कि 12 नवम्बर को AIGC के धरने में अवश्य शामिल होकर अपनी मातृ संस्था को मजबूत बनाएं
🙏🙏🙏धन्यवाद 🙏🙏🙏🙏
राजेश गुप्ता
Ex CVP/AIGC