09/06/2026
जहन्नुम की “विशेषताएँ”
आम तौर पर जब जहन्नुम का ज़िक्र होता है तो लोगों के चेहरों पर गंभीरता छा जाती है। लेकिन यदि थोड़ा हल्के और व्यंग्यात्मक अंदाज़ में सोचा जाए तो मालूम होता है कि कुछ लोग अपनी आदतों के कारण ऐसी जगहों को भी “आरामदेह” बना लेने का हुनर रखते हैं। इसी विचार के तहत जहन्नुम की कुछ “विशेषताएँ” प्रस्तुत हैं:
जहन्नुम की सबसे बड़ी “खूबी” यह है कि वहाँ पहुँचने वाला प्रायः वही होता है जिसने पूरी ज़िंदगी अपने मन और इच्छाओं की ही सुनी। जैसा दिल ने चाहा, वैसा किया; जिस राह पर जी चाहा, उसी पर चलता रहा। मानो यह वह स्थान है जहाँ इंसान अपनी इच्छाओं के पीछे चलते-चलते आख़िरकार पहुँच जाता है।
जन्नत के लिए इबादत, सब्र, अच्छे आचरण और नेक कर्मों की ज़रूरत होती है। लेकिन जहन्नुम तक पहुँचने के लिए किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं। थोड़ा-सा घमंड, थोड़ी-सी लापरवाही और कुछ बेपरवाही साथ हो तो रास्ता स्वयं बन जाता है।
वहाँ अकेलेपन की समस्या कम होगी। दुनिया में जिन लोगों के साथ बैठकर बेकार की बहसें और निरर्थक बातें की जाती थीं, संभव है वही मंडली वहाँ भी मौजूद हो। हर कोई अपने “कारनामों” का बखान करता नज़र आए।
यह भी एक दिलचस्प “सुविधा” है कि वहाँ दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं और प्रभावशाली लोगों से मुलाक़ात हो सकती है। वही लंबे भाषण, वही वादे और वही बहसें। फ़र्क बस इतना होगा कि वहाँ किसी को वोट नहीं देना पड़ेगा।
वहाँ पहुँचने वाले अक्सर कहते सुनाई देंगे— “हम अकेले कहाँ थे, सब यही कर रहे थे!”
कोई समय को दोष देगा, कोई परिस्थितियों को। मानो बहानों का एक विशाल पुस्तकालय ही वहाँ मौजूद हो।
जो लोग दुनिया में हमेशा स्वयं को सबसे अधिक बुद्धिमान और सही मानते थे, वहाँ भी उनका यही स्वभाव बना रहेगा। हर व्यक्ति अपने कर्मों के लिए कोई न कोई तर्क प्रस्तुत करके स्वयं को निर्दोष साबित करने की कोशिश करेगा।
कुछ लोगों को हर विषय पर राय देने की आदत होती है—राजनीति, धर्म, अर्थव्यवस्था, खेल या समाज। संभव है कि वहाँ भी वे अपनी इस आदत को जारी रखें और नई-नई “विश्लेषण सभाएँ” आयोजित करें।
यह जहन्नुम की एक विचित्र “विशेषता” है कि वहाँ पहुँचकर भी बहुत से लोग देर तक यह मानने को तैयार नहीं होंगे कि वे ग़लत रास्ते पर थे। हर व्यक्ति यही समझेगा कि वह तो ठीक था, बस परिस्थितियाँ उसके विरुद्ध थीं।
और इन सभी “विशेषताओं” का सार यही है
“हर जहन्नुमी स्वयं को जन्नती समझता है।”
टी एम ज़िया उल हक़
#नर्क #जहन्नुम