05/09/2025
सेवा में,
सचिव, रेलवे बोर्ड,
रेल भवन, नई दिल्ली।
विषय : रेल कर्मचारियों के वृद्ध माता-पिता को आश्रित मानकर पास एवं मेडिकल सुविधा प्रदान किए जाने हेतु अनुरोध।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि भारतीय रेल कर्मचारियों के आश्रित माता-पिता संबंधी नियमावली वर्तमान समय में अत्यंत अव्यावहारिक है।
वर्तमान प्रावधान के अनुसार केवल माता को तभी आश्रित माना जाता है जब पिता की मृत्यु हो चुकी हो।
यदि माता की मृत्यु हो जाए तो पिता को आश्रित नहीं माना जाता, चाहे उनकी आयु 100 वर्ष ही क्यों न हो।
यहाँ तक कि यदि माता-पिता दोनों जीवित हों और उनकी आयु 100 वर्ष से अधिक हो, तब भी उन्हें कर्मचारी पर आश्रित नहीं माना जाता।
यह स्थिति वास्तविकता से बिल्कुल अलग है, क्योंकि इस उम्र में माता-पिता पूर्णत: असहाय होकर अपने पुत्र/पुत्री (रेल कर्मचारी) पर निर्भर रहते हैं।
अन्य विभागों जैसे डिफेंस, पैरामिलिट्री फोर्सेस एवं राज्य सेवाओं में आश्रित माता-पिता को मेडिकल एवं अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं, किंतु भारतीय रेल में यह सुविधा नहीं है। यह न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय है, बल्कि वृद्ध माता-पिता के प्रति संवेदनहीनता भी है।
अतः हमारी स्पष्ट मांग है कि —
1. यदि रेल कर्मचारी के माता या पिता की आयु 60 वर्ष से अधिक है, तो उन्हें स्वतः आश्रित माना जाए।
2. आश्रित माने जाने पर उन्हें मेडिकल सुविधा (रेलवे अस्पतालों एवं स्वास्थ्य सेवाओं में निःशुल्क उपचार) उपलब्ध कराई जाए।
3. रेल कर्मचारी को प्रतिवर्ष मिलने वाले तीन प्रिविलेज पास में से कम से कम एक पास पर माता-पिता को शामिल करने की अनुमति दी जाए।
इस मांग को लागू करने से न केवल कर्मचारियों के पारिवारिक उत्तरदायित्व हल्के होंगे, बल्कि वृद्धजनों की गरिमा व सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
अतः आपसे निवेदन है कि उक्त मांग पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।
भवदीय,
मोती राम मीना
CRS/AF